शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

"गाय" का ब्वायफ्रेंड और "बैल" का बाप

और अंततः राहुल बेबी ने अपनी इटालियन अम्मा से पूछ ही लिया कि,
"मम्मा, अगर लड़कों को गाय (GUY) कहा जाता है तोक्या मैं किसी "बैल" का ब्वायफ्रेंड और "बछड़े" की माँ बनुँगा?"

तब अम्मा नें भी छाती पीट कर जवाब दिया,
"नहीं पुत्तर, तू "बैल" ही है, GUY नहीं। इसीलिये तू किसी "गाय" का ब्वायफ्रेंड और "बैल" का ही बाप बनेगा।
ठीक वैसे ही, जैसे तेरे अब्बा के साथ हुआ था।"

खी... खी... खी...

- सुमित सुमन

गुरुवार, 29 अगस्त 2013

रूपये के गिरने के नये रिकॉर्ड

रुपया दिन-प्रतिदिन गिरने के नये रिकॉर्ड बनाता जा रहा है, परन्तु आज भी वह यह सोचकर दुःखी हो जाता है कि "गिरे होने" के मामले में दिग्विजय बाबू हमेंशा उससे चार कदम आगे ही रहेंगे।

और काँग्रेस इस बात पर गर्व कर सकती है कि "रुपये के गिरने को चुनौती देनेवाला" उसी की पार्टी से है।

खी... खी... खी...

- सुमित सु्मन

आतंकवादी नहीं "हास्यवादी"

मुझे नहीं पता कि तब के जमाने में बच्चे गब्बर का नाम सुनकर कैसा रिएक्ट करते थे, पर इन आतंकवादियों के नाम सुनकर आज के जमाने में बच्चे हँसते जरूर हैं। ;)

जरा गौर कीजिये, "टुँडा"… या "भटकल"। यार कैसा नाम हुआ ये भला। एक तो मानो लगता है कि कोई सब्जी का नाम हो - भिंडा। जब पहली बार इसका नाम सुना तो दस मिनट तक खीखीयाना रोक ही ना सका। नाम ही ऐसा है।  और "भटकल"… ये तो किसी भी एंगल से आतंकवादी का नाम लगता ही नहीं है। "उदास", "अकेला", "अलबेला", "अनजाना", "बैरागी", "भटकल"; प्रायः शायरों के नाम में ऐसे टाइटल हुआ करते हैं। ऐसे टाइटलों के लगे होने से कोई "टुच्चे" शायर भी हों तो वो "बड़े साहित्यकार" प्रतीत होते हैं। परंतु कोई "टुच्चा" जो अपने आप को आतंकवादी कहता हो तथा अपने नाम ऐसे हास्यास्पद रखता हो तो मुझे नहीं लगता कि उससे कोई डरेगा भी। "आँख का अँधा, नाम नयनसुख" वाली कहावत ऐसे ही लोगों के लिये लिखी गयी है शायद। जो आतंक पैदा करे वो हुआ आतंकवादी, परन्तु जो हास्य पैदा कर दे वो काहे का आतंकवादी! "हास्यवादी" कहो भाई।

इतिहास में पढ़ा था। पुराने जमाने में भी दहशतगर्द हुआ करते थे, मसलन "चँगेज़ ख़ाँ"। नाम सुनकर ही कितनों की धोती गीली हो जाती होगी। वहीं, एक था "मुहम्मद गोरी"… मुझे नहीं लगता कि इसके नाम से कोई ख़ौफ़ खाता होगा। मेरी तो हँसी छूट जाती है। ये भी कोई नाम हुआ… "गोरी"। इससे ज्यादा डरावने तो आज-कल की गोरियों के होते हैं, जिनके नाम सुनते ही बेचारे पतिदेव के पसीने छूटने लगते हैं। ;)

अब भैय्या, कहलाते हैं आतंकवादी तो नाम से भी तो लगना चाहिये ना कि अमुक आदमी "आतंकवादी" है। माना कि अब "चँगेज़ ख़ाँ" और "तुर्रम ख़ाँ" टाइप नाम फ़ैशन में नहीं रहे, आउटडेटेड हो चुके हैं। या ये भी मान सकता हूँ कि ये आतंकवादियों की कोई नयी रणनीति हो ताक़ि इन्टरपोल की आँखों में धूल झोंका जा सके। शायद वो सोचते होंगे कि इस्लाम तो वैसे ही बदनाम है विदेशी एयरपोर्टों पर, ऐसे में अगर नाम भी "ख़तरनाक़" टाइप रख लिये तो भविष्य में ना तो कोई "टावर" उखाड़ पायेंगे ना ही "कुछ" और उखाड़ पायेंगे। परन्तु ऐसी भी क्या नामों की किल्लत हो गयी है आतंकवादी समाज में!

मेरी तो उन हास्यवादियों को यही राय है कि भैय्या भूतकाल के "मुहम्मद गोरी" अथवा "गोलमाल" के "बबली भाई" से प्रेरित होकर अपने नाम मत रखा करो। नाम ऐसे रखो कि सुन कर ही दहशत पैदा हो जाये दिल में। धोती ना सही, पर पैन्ट तो जरूर गीली-पीली हो जाये लोगों की। मेरा कर्तव्य था, सो आपको सलाह दे दिया। आगे आपकी मर्ज़ी।
चलता हूँ, राम-राम!!!

- सुमित सुमन

बुधवार, 28 अगस्त 2013

देश की "खलनायिका" सोनिया गाँधी

जिस तरह पुरानी फ़िल्मों में अदालत के फ़ैसला सुनाने से तीस सेकेण्ड पहले
खलनायक के सीने में ज़ोरदार दर्द उठा करता था
और झूठा अटैक भी आ जाया करता था, ताक़ि तारीख़ बढा दी जाये,
वैसा ही कुछ बीते दिनों देश की खलनायिका सोनिया गाँधी के साथ भी हुआ।

फ़र्क़ बस इतना था कि अभी "संसद" था,
और मामला "खाद्य सुरक्षा बिल" पास करवाने का था।
"अदलत" में फ़िर कभी।
और देखिये ना, इधर उन्हे सीने में "कथित" दर्द हुआ
और उधर "खाद्य सुरक्षा बिल" पारित हो गया। ;)

वैसे एम्स में काफ़ी काँग्रेसी पधारे हुये थे। अगर टुँडा सनक जाता
तो साला पूरा एम्स ही उड़ा देता। 3:)
 
- सुमित सुमन

मंगलवार, 27 अगस्त 2013

सोनिया गाँधी के दिल का दर्द

"सोनिया गाँधी को सीने मेँ दर्द की शिकायत, एम्स मेँ भर्ती"

तो इसमें इतनी हैरानी की क्या बात है?
उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर "पेट में दर्द" तो होने से रहा!!! ;) 3:)

परन्तु "लाख-टके" का सवाल तो ये है कि,
उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर किसको दिल देके दिल का दर्द मोल ले ली बेचारी!
कहीं वो एम्स में ही भर्ती "टुँडा" तो नहीं। ;)

खी… खी… खी… ;)

- सुमित सुमन

सोमवार, 26 अगस्त 2013

नेतागिरी

देश के नेताओं पर ना जाने कितने रं-बिरंगे तथा छप्पन प्रकार के सँगीन आरोप लगते रहे हैं। दुनिया का कोई ऐसा कुकर्म नहीं है जो इन्होंने ना किया हो।

ऐसे में मुझे एक ही डर लगा रहता है कि कहीं किसी नेता पर "छीन-छोरी" अथवा "पॉकेटमारी" जैसे छोटे-मोटे-टुच्चे आरोप ना साबित हो जाए। बेचारे की इज्जत पलीद हो जाएगी। चार नेताओं के बीच बेचारे कभी अपना सिर नहीं उठा पायेंगे।

खी... खी... खी... ;) 3:)

- सुमित सुमन

मौन-स्वीकृति बिल

2014 से पहले काँग्रेस अपने आख़िरी हथियार तथा मनमोहनी-ढाल के रूप में
"मौन-स्वीकृति बिल" लाने वाली है।

- सुमित सुमन

यूपी में ओसामा का पुनर्जन्म

और इस तरह यूपी ने गुँडई के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित करते हुए तालिबान को भी मात दे दी है।

विश्वस्त सूत्रों ने अभी-अभी पुष्टि की है कि
72 हूरों के बीच विराजमान "श्री" ओसामा ने भी जन्नत के सुख को ठुकराते हुए
एक बार पुनः यूपी की पावन "मुल्लायम" भूमि में जन्म लेने की इच्छा जताई है।

खी... खी... खी...  ;)

- सुमित सुमन

रविवार, 25 अगस्त 2013

हाय रे महँगाई डायन!

हम नन्हें-मुन्नों को तो "महँगाई है" तथा "रूपैया का भाव गिर रहा है" का पता तब चलता है,
जब हम हाजमोला के पैकेट खरीदते हैं और पाते हैं कि,
अब एक रुपये मे छः की जगह चार गोलियाँ ही मिल रही हैं। :(

"हाय रे महँगाई डायन! हमें भी ना छोड़ा!!!" :'(

- सुमित सुमन

रूपये की आखिरी ख़्वाहिश

रूपये की अब एक ही ख़्वाहिश बची है…
आखिरी ख़्वाहिश…!

"धरती फट जाये और मैं इतना नीचे चला जाउँ कि उसमें समा जाउँ।"
 

सब दिन होत ना एक समाना

कल उन्होंने जितनों को लैपटॉप बाँटा होगा,
आज वो सभी लोग उसी लैपटॉप पर फेसबुक चला कर उन्हें ही गरिया रहे होंगे।

इसे ही कहते हैं भैय्या :
"सब दिन होत ना एक समाना।" ;)


- सुमित सुमन

मुल्लायम एंड सन्स

बड़े चालू हैं "मुल्लायम एंड सन्स"। हिन्दू धर्म में एक भी अप्सरा तो मिलने से रहीं,
अतः इन दल-बदलुओं ने "72 हूरों" की ओर रुख़ कर लिया।

खी... खी... खी.. ;) 

- सुमित सुमन